देहरादून (उत्तराखंड) : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू शुक्रवार को उत्तराखंड के दो दिन के दौरे पर जॉली ग्रांट एयरपोर्ट पहुंचीं। राजधानी पहुंचने पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामि ने उनका स्वागत किया।आने के बाद, राष्ट्रपति कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच शहर के लिए रवाना हुईं। अपनी यात्रा के दौरान, राष्ट्रपति मुर्मू शनिवार को राज्य की राजधानी में इंडियन मिलिट्री एकेडमी में पासिंग आउट परेड में शामिल होंगी।इससे पहले, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को राष्ट्रपति भवन में आयोजित डिफेंस इन्वेस्टीचर सेरेमनी 2026 के पहले चरण में सशस्त्र बलों, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और राज्य व केंद्र शासित प्रदेश की पुलिस के जवानों को 51 वीरता पुरस्कार प्रदान किए। इनमें सात कीर्ति चक्र, 15 वीर चक्र और 29 शौर्य चक्र शामिल थे।रक्षा मंत्रालय के अनुसार, पुरस्कारों में दो कीर्ति चक्र (मरणोपरांत), तीन वीर चक्र (मरणोपरांत) और एक शौर्य चक्र (मरणोपरांत) शामिल थे। ये सम्मान चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में ऑपरेशन के दौरान असाधारण साहस, बहादुरी और कर्तव्य के प्रति समर्पण दिखाने वाले जवानों को दिए गए।

एक विज्ञप्ति के अनुसार, कीर्ति चक्र पाने वालों में 34 राष्ट्रीय राइफल्स से जुड़ी रेजिमेंट ऑफ आर्टिलरी के लांस नायक मीनाक्षी सुंदरम ए, 2 पैरा (स्पेशल फोर्सेज) के नायब सूबेदार डोलेश्वर सुब्बा, 1 असम राइफल्स के मेजर अर्शदीप सिंह, भारतीय वायु सेना के एयर कमोडोर प्रशांत बालकृष्णन नायर और 4 पैरा (स्पेशल फोर्सेज) के कैप्टन लालरिनौमा सैलो शामिल थे।वीर चक्र पाने वालों में सेना के कर्नल कोशंक लांबा; भारतीय वायु सेना के कई पायलट, जिनमें ग्रुप कैप्टन रंजीत सिंह सिद्धू, मनीष अरोड़ा, अनिमेष पटनी और कुणाल कालरा शामिल हैं; साथ ही ऑपरेशन के दौरान वीरता के लिए पहचाने गए सेना और वायु सेना के अन्य जवान शामिल थे। राष्ट्रपति ने उन जवानों को मरणोपरांत पुरस्कार भी दिए जिन्होंने ड्यूटी के दौरान सर्वोच्च बलिदान दिया। इनमें महार रेजिमेंट के सिपाही जंजाल प्रवीण प्रभाकर और आर्मी सर्विस कोर के लेफ्टिनेंट शशांक तिवारी शामिल थे, जिन्हें कीर्ति चक्र (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया।
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, जम्मू-कश्मीर लाइट इन्फैंट्री के राइफलमैन सुनील कुमार और सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेज के दो जवानों को वीर चक्र (मरणोपरांत) मिला, जबकि 4 राष्ट्रीय राइफल्स के लांस दफादार बलदेव चंद को शौर्य चक्र (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया।
